Thursday, August 14

मदारी

बूँद गिरे, रुई ढके
और जग नाचे,
बिल्ली की गोद में
ऊन डोले|

कौन देखा, कौन सुना,
प्रेत से पूछो, बरसाती रात को,
न दिया जले, न दिल हो भस्म,
डगर-डगर पे हरी की आस|

Labels: